खेल गाँव बनकर लगभग तैयार है और गगन छूती इमारतें देखने में शानदार लग रही है । लेकिन क्या हमने कभी ये सोचा है की उन हज़ारों गरीब मजदूरों का. जिन्होंने अपने खून पसीने और मेहनत से सालों में इसे तैयार किया।
सरकार का क्या रूख है इन मजदूरों के लिए इसका कुछ पता नहीं लेकिन ये तो ज़रूर है की जब यह काम ख़त्म हो जाएगा तो यहाँ रह रहे इन हज़ारो लोगों को उनका उचित अधिकार नहीं मिल पायेगा । क्योंकि सीधी सी बात है की अपने आँगन में गंदगी किसी को पसंद नहीं होती है वो चाहे आप हो या हम । दिल्ली सरकार के सामने यह एक बहुत बड़ी चुनौती होगी की इनके विस्थापन का सही इंतजाम हो ।