हमले रुकने का नाम नही ले रहे है और ना ही नेताओ के वादे। ना जाने कितने हमले और कितने वादे नेताओ के। लगता है ये सब की आदत पड़ चुकि है हमारे नेताओं को । रोज़ सुरक्षा के नये वादे, दो दिन का हाईअलर्ट और फ़िर से सब-कुछ वापिस उसी जगह पर और इन सबका शिकार बेचारी जनता होती है।
भारत के सभी छोटे बड़े आतंकी मामलों मे सभी राजनीतिक दल अपनी राजनीति शुरु कर देते है और अपनी रोटीयां सेंकने से बाज भी नही आते है। नेताओं को सिर्फ़ अपने और अपने वोट से मतलब है।
इन सब के बीच हम राज ठाकरे को कैसे भूल सकते है। इनके बारे मे कहा जाय तो ये महानुभाव लाखों उत्तर भारतीयों को मुम्बई से खदड़ने के लिए अपनी कमर कस रखी थी और मनसे की सेना इसे बखूबि अंजाम देने मे लगी थी। फ़िर क्या समुद्र के रास्ते आये 26 आतंकियो को वो खदेड़ नही सके? आतंकवादियों ने पूरे मुम्बई मे मौत का तांडव मचाया और सारे मुम्बई को तबाह कर डाला। फ़िर कहां थे राज़ ठाकरे और उनकी सेना मनसे ! इससे साफ़ पता चलता है कि सभी नेता सत्ता और पैसे के भुखे है।
मुम्बई मे हुई इतनी बड़ी आतंक की घटना अपने पीछे कई सवाल छोड़ गयी। मुम्बई मे आतंकवादि इतनी बड़ी आतंक की घटना को अंजाम दे गये तब कहाँ थे ये नेता। क्या इन्हे सिर्फ़ आम चुनाव के समय जनता की याद आती है? कहां थी गृहमंत्रालय और कहां था भारत का इंटेलिजेंस …? क्या सब सो रहे थे? मुम्बई दिल्ली और कुछ अन्य बड़े शहर मे आतंकि कार्यवाही के बारे मे पहले हि भारत को अमेरीका के खूफ़िया विभाग ने सूचित कर दिया था फ़िर क्या पूरा सिस्टम सो रहा था? अगर सभी अपने जिम्मेदारी का सही रूप से निर्वहन नही करेंगे तो ये आतंकवादि ही अपने काम को बखूबी अंजाम देंगे और सहर्ष उसकी जिम्मेदारी लेंगे। हमें पता है की सभी अपने जिम्मेदारी का वहन सही रूप से नही करते है और इसी का फ़ायदा आतंकवादि उठा ले जाते है।
Wednesday, August 12, 2009
शायद आतंकवाद भारत का साया बन चुका है !
आतंकवाद की मार झेल रहे भारत में पिछले छह वर्षो के दौरान हुई आतंकवादी घटनाओं में तकरीबन 600 लोग मारे गये और हजारों घायल हुए । इनमे कई निर्दोश मारे गये और कई घायल हुए है पर आतंकवाद कम नही हो रही है । क्या कारण है कि लोग एक दुसरे के खून के प्यासे बन गये है ? रावण मारा गया क्योकिं विभीषण उसका भाई था हमारे घर में कौन विभीषण है शायद हम ये कभी नहीं जान पायेंगे क्योंकि हम पैसे के पीछे भाग रहे है और इंसानीयत भूल बैठे है !
असम, 30 अक्टूबर, 2008: एक के बाद एक 12 बम विस्फोट हुए जिससे पुरा असम दहल उठा जिनमें तकरीबन 61 लोग मारे गए और 300 से अधिक घायल हो गए।
इंफाल, 20 अक्टूबर, 2008: मणिपुर पुलिस कमांडो परिसर के निकट एक शक्तिशाली विस्फोट हुआ जिसमें 17 लोगों की मौत हो गई।
कानपुर, 14 अक्टूबर, 2008: कोलोनेलगंज बाजार में हुए विस्फोट में आठ लोग घायल हो गए।
मालेगांव (महाराष्ट्र), 29 अक्टूबर 2008: एक भीड़भाड़ वाले बाजार में मोटरसाइकिल के जरिए किए गए विस्फोट में पांच लोग मारे गए।
मोदासा(गुजरात), 29 सितंबर, 2008: मोटरसाइकिल द्वारा किए गए विस्फोट में एक व्यक्ति की मौत हो गई और कई घायल हो गए।
नई दिल्ली, 27 सितंबर, 2008: महरौली में हुए बम विस्फोट में तीन लोगों की मौत हो गई।
नई दिल्ली, 13 सितंबर, 2008: शहर में हुए छह सिलसिलेवार बम धमाकों में 26 लोगों की मौत हो गई।
अहमदाबाद, 26 जुलाई, 2008: दो घंटों के अंदर कई विस्फोट हुए जिनमें 57 लोगों की मौत हो गई।
बेंगलुरू, 25 जुलाई, 2008: सात बम विस्फोट हुए जिनमें कम से कम दो लोगों की मौत हो गई।
जयपुर, 13 मई, 2008: सिलसिलेवार विस्फोट में 68 लोग मारे गए।
हैदरबाद, 25 अगस्त, 2008: दो बम विस्फोटों में 42 लोग मारे गए।
समझौता एक्सप्रेस, 19 फरवरी, 2007: भारत और पाकिस्तान के बीच चलने वाली इस ट्रेन में धमाका हुआ जिसमें 66 लोगों की मौत हो गई।
मालेगांव, 8 सितंबर, 2006: दो विस्फोटों में 40 लोग मारे गए।
मुंबई, 11 जुलाई, 2006: लोकल ट्रेन में हुए सात बम विस्फोटों में 209 लोगों की मौत हो गई।
वाराणसी, 7 मार्च, 2006: एक मंदिर और रेलवे स्टेशन पर हुए विस्फोट में 21 लोग मारे गए।
नई दिल्ली, 29 अक्टूबर, 2005: दीपावली से ठीक पहले कई विस्फोट हुए जिनमें 61 लोगों की जान चली गई।
मुंबई, 25 अगस्त, 2003: दो विस्फोटों में 46 लोगों की मौत हो गई।
गांधीनगर, 24 अगस्त, 2002: अक्षरधाम मंदिर पर आतंकवादी हमला हुआ जिसमें 34 लोग मारे गए।
गंगा नदी का अस्तित्व खतरे में…।
गंगा नदी हम भारतीयो की आस्था का प्रतीक रही तथा है और गंगा के जल को अमृत का दर्जा दिया गया है । हमारे धार्मिक ग्रन्थों मे लिखा गया है कि गंगा के पानी मे स्नान करने से सारे पाप धुल जाते हैं ! उसकी पवित्रता केवल आध्यात्मिक दृष्टी से ही नहीं बलिक भौतिक कारणों से भी उसका जल इतना पवित्र स्व्च्छ हुआ करता है लेकिन अब यह प्रदुषण की चपेट में आकर अपना भौतिक चमत्कार खो रही है ! गंगा के उदगम स्थान गंगोत्री से लेकर गंगा सागर में मिलने तक के विभिन्न स्थानो पर उसका जल लगातार प्रदुषित किया जा रहा है ! कुछ स्थानो पर तो पानी नहाने लायक भी नहीं रहा है ! गत दो द्शको से गंगा की सफ़ाई सरकारी तथा गैरसरकारी स्तरों पर होती रही है और विशेषज्ञों के अनुसार जल स्थिति में कुछ सुधार के लक्षण भी दिखलाई दिए हैं ,पर काम करने वाले लोग गंगा नदी में हाथ धोने के आदी हैं और धोते रहते हैं ! पानी सिर्फ़ अब उपभोग की वस्तु बन कर रह गया है ! एक तरफ़ ग्लेशियर सिकुडे है वहीं दूसरी तरफ़ गंगा की धारा में भी अब वह आवेग कंहा है? गंगा जल मे घुलित आक्सीजन की मात्रा लगातार कम होती गई है !
डर तो इस बात का है कि गंगा अपनी बहन यमुना की भांति ना हो जाए ! इसी कारण इसकी सफ़ाई की ओर ध्यान देना जरुरी है ! 1985 के एक्शन प्लान के तहत नदी की सफ़ाई के प्रयासों पर 900 करोड रु खर्च किए गए ! लेकिन इसके नतीजे अच्छे नहीं रहे है ! अब तो केन्द्र सरकार ने इसे राष्ट्रीय नदी घोषित करने का फ़ैसला लिया है ! सभी राज्यों के मुख्यमंत्री इसके सदस्य होंगे और उठने वाली समस्याओं का समाधान एक साथ करेंगे ! सरकार ने नई पहल के जरिए इसे स्वच्छ – प्रदुषण मुक्त बनाने का बीडा उठाया है पर भारत मे काम सिर्फ़ कागजों पर हि होते है ।
शायद भारतीय इस नदी को माँ तो कहते है पर माँ का दर्जा देना भूल गये है । जरुरत है हमें इसे ना सिर्फ़ मा कहने की पर माँ जैसा ख्याल भी रखने की तभी हम अपने मां को स्वस्थ और सुरक्षित बना पायेंगे ।
डर तो इस बात का है कि गंगा अपनी बहन यमुना की भांति ना हो जाए ! इसी कारण इसकी सफ़ाई की ओर ध्यान देना जरुरी है ! 1985 के एक्शन प्लान के तहत नदी की सफ़ाई के प्रयासों पर 900 करोड रु खर्च किए गए ! लेकिन इसके नतीजे अच्छे नहीं रहे है ! अब तो केन्द्र सरकार ने इसे राष्ट्रीय नदी घोषित करने का फ़ैसला लिया है ! सभी राज्यों के मुख्यमंत्री इसके सदस्य होंगे और उठने वाली समस्याओं का समाधान एक साथ करेंगे ! सरकार ने नई पहल के जरिए इसे स्वच्छ – प्रदुषण मुक्त बनाने का बीडा उठाया है पर भारत मे काम सिर्फ़ कागजों पर हि होते है ।
शायद भारतीय इस नदी को माँ तो कहते है पर माँ का दर्जा देना भूल गये है । जरुरत है हमें इसे ना सिर्फ़ मा कहने की पर माँ जैसा ख्याल भी रखने की तभी हम अपने मां को स्वस्थ और सुरक्षित बना पायेंगे ।
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