हार गई टीम इंडिया.. लुट गया सम्मान.. छिन गया ताज.. दौरे में लगातार आठवीं हार.. नहीं रुक रहा हार का सिलसिला.. क्यों हार रही है टीम इंडिया.. अरे रुकिये जनाब.. आठ मैच हारे नहीं की बोलने लगे.. कि हार गई टीम इंडिया.. हार गई टीम इंडिया.. अरे साहब हारने के लिए भी जज्बे की जरुरत होती है.. एक दो मैच तो कोई भी टीम हार सकती है.. लेकिन आठ मैच लगातार हारना बड़ी बात होती है.. इसके लिए हौसले की जरुरत होती है.. जुनुनी होना पड़ता है.. पागलपन की जरुरत होती है.. और वो भी ऐसा जुनुन की मैदान पर उतरते के साथ सिर्फ हार ही हार नजर आए.. लेकिन टीम इंडिया ने कंसिसटेंट परफॉरमें देते हुए ये भी कर दिखाया.. क्या आपको जरा सी भी अंदाजा है कि इसके लिए टीम इंडिया को कितनी मेहनत करनी पड़ी होगी.. कितने IPL के मैचों खेलने पड़े होगें.. लगातार बिना थके क्रिकेट खेलते रहना पड़ा होगा.. कितना मुश्किल होता है IPL में चोट से खुद को बचाते हुए पैसों के लिए खेलते रहना.. औऱ फिर जब देश के लिए खेलना हो तो चोटिल हो जाना.. औऱ ये हार खास इसलिए भी है क्योंकि टीम ऐसे वक्त में मैच हार रही है जब हाल में ही वर्ल्ड चैम्पीयन बनी है... औऱ हाल में ही टेस्ट में दुनिया की नंबर वन टीम रही हो.. इतने तमगों के साथ हारना.. बाप रे बाप.. जूनुन चाहिए भाई साहब.. कितनी सम्मान की बात है कि हम टेस्ट रैंकिंग मे नंबर एक से नंबर तीन पर आ गए... अब आप ही बताइए कि एक बड़ी या तीन.. या फिर यूं कहे कि अक्ल बड़ी की भैंस.. टीम के हिसाब से तो भैंस.. लेकिन कितने दुख की बात है कि इतनी मेहनत करने के बाद भी टीम के साख, विश्वसनीयता और खेल पर सवाल उठाए जा रहे हैं.... अरे जरा सोचिए... क्या टीम इंडिया को हारने का मन नहीं करता.. क्या वो हमेशा जीतते रहें.. क्या टीम के सीने में दिल नहीं है हम उनकी भावनाओं को क्यूं नहीं समझ पाते. वैसे भी अगर भरतीय टीम हारी है तो उसमें टीम की खेल भावना है अब आप पूछेंगे की हारने में कैसी खेल भावना.. दरअसल दुसरों को भी तो मौका देना खेल भावना की परिचायक ही होता है और हमने तो इंग्लैंड को मौका दिया है.. सो इतनी छोटी सी बात पर हाय तौबा क्यूं मचा रहे हैं आप.. हम तो बस इतना कहेंग कि टीम ने जो हार का जज्बा दिखाया है वो कमाल का है औऱ सभी को उसका सम्मान करना चाहिए..