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| कमल हासन |
देश में सरेआम, आवाम से आवाज... कलाकार से कला... तंत्र से लोक को अलग किया जा रहा है.... यानी लोकतंत्र अब हाशिए पर है... हाल के महीनों में अन्ना की लड़ाई देखी, रामदेव का हुंकार भी देखा... इंडिया गेट पर बिना नेता वाला विरोध देखा... अब एक कलाकार की दहाड़ देख रहा हूं.... कमाल के अभिनेता औऱ कई राष्ट्रीय फिल्म विजेता कमल हासन इन दिनों अपने और अपने फिल्म के वजूद के लिए सियासी लकड़बग्घों से उलझे हुए हैं... वो चाहते थे कि जिस शिद्दत के साथ ये फिल्म बनाई गई है उसी जोश के साथ इसे सिनेमाघरों में दर्शक सराहें.. लेकिन शिकार की फिराक में बैठा सियासी होशियारों का झुंड ने कमल पर हमला बोल दिया... गौरतलब है कि 'विश्वरूपम' का तमिल और तेलुगू संस्करण 25 जनवरी को रिलीज होना था लेकिन कुछ मुस्लिम संगठनों की शिकायत पर तमिलनाडु सरकार ने एक दिन पहले ही दो हफ्तों के लिए इस फिल्म को प्रदर्शित करने पर प्रतिबंध लगा दिया था.शिकायत की गई थी कि फिल्म के कुछ दृश्यों में संप्रदाय विशेष को गलत ढंग से चित्रित किया गया है. इससे पहले 'विश्वरूपम' मंगलवार को कर्नाटक के सिनेमाघरों में पुलिस सुरक्षा के बीच प्रदर्शित की गई थी. 95 करोड़ रुपये की लागत से बनी यह फिल्म 25 जनवरी को रिलीज हुई थी लेकिन पहले शो के बाद इसके प्रदर्शन पर प्रतिबंध लग गया था. अब ज़रा फ़र्ज़ कीजिए कि एक इंसान से उसकी जीने आज़ादी छीन ली जाए तो उसपर क्या गुज़रेगी... एक चित्रकार से उसका ब्रश छीन लिया जाए तो क्या वो जी पाएगा... एक गायक की आवाज पर पाबंदी लगा दी जाए तो क्या होगा.... ये तमाम सवाल वैसे ही हैं जैसे कमल हासन औऱ उनकी फिल्म पर उपजा विवाद है... सविंधआन की धारा 15(ए) के मुताबिक़ हर इंसान को अभिव्यक्ति की आज़ादी का अधिकार है... लेकिन जो दिख रहा है वो संविधान के नियमों को भी दरकिनार कर रहा है... धर्म के नाम पर फिल्म से खिलवाड़ करने वाले लोग क्या खुद धर्म का बखूबी पालन कर रहे होंगे... मजहब को केंद्र बनाकर हमसे हमारा हक़ छीनने वाले ये भूल रहे हैं कि आने वाला वक्त हमारा है... जिसमें ये सारे पैंतरे धरे के धरे रह जाएंगे... वैसे भी विवाद खड़ा करने के बाद कंबल ओढ़ के घी पीने की आदत हमारे नेताओं की पुरानी रही है.... वो तो शुक्र है कि आज बापू औऱ सरदार पटेल जैसे नेता हमारे बीच नहीं है नहीं तो सादा कुर्ता और खाकी कोट का ये बदनुमा चेहरा देख कर वो भी रो पड़ते... बहरहाल अब खबर ये भी है कि कमल हासन की विवादस्पद फिल्म ‘विश्वरूपम’ पर केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी कानून में बदलाव कर सकते हैं... सूत्रों के मुताबिक एक्ट में संशोधन के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय एक समिति का गठन करने जा रहा है... सरकार ऐसी अपीलेट बॉडी गठित करना चाहती है जहां राज्य सरकारें अपील कर सकें... तिवारी जी का कहना है कि अब समय आ गया है कि सिनेमेटोग्राफी एक्ट में संशोधन किया जाए ताकि राज्य सरकारें सेंसर बोर्ड की ओर से जारी प्रमाण पत्र पर सवाल खड़े न कर सकें... नहीं तो हर राज्य के लिए अपना सेंसर बोर्ड हो... लेकिन मनीष जी ये बताएं सत्ता की चाबी जिन लोगों के हाथ में हैं या रहेगी ये कानून उनके लिए कितना कारगर होगा... जवाब आप औऱ हम दोनों बखूबी जानते हैं...
