Wednesday, August 12, 2009

आतंकी हमले, नेता और वादे

हमले रुकने का नाम नही ले रहे है और ना ही नेताओ के वादे। ना जाने कितने हमले और कितने वादे नेताओ के। लगता है ये सब की आदत पड़ चुकि है हमारे नेताओं को । रोज़ सुरक्षा के नये वादे, दो दिन का हाईअलर्ट और फ़िर से सब-कुछ वापिस उसी जगह पर और इन सबका शिकार बेचारी जनता होती है।
भारत के सभी छोटे बड़े आतंकी मामलों मे सभी राजनीतिक दल अपनी राजनीति शुरु कर देते है और अपनी रोटीयां सेंकने से बाज भी नही आते है। नेताओं को सिर्फ़ अपने और अपने वोट से मतलब है।
इन सब के बीच हम राज ठाकरे को कैसे भूल सकते है। इनके बारे मे कहा जाय तो ये महानुभाव लाखों उत्तर भारतीयों को मुम्बई से खदड़ने के लिए अपनी कमर कस रखी थी और मनसे की सेना इसे बखूबि अंजाम देने मे लगी थी। फ़िर क्या समुद्र के रास्ते आये 26 आतंकियो को वो खदेड़ नही सके? आतंकवादियों ने पूरे मुम्बई मे मौत का तांडव मचाया और सारे मुम्बई को तबाह कर डाला। फ़िर कहां थे राज़ ठाकरे और उनकी सेना मनसे ! इससे साफ़ पता चलता है कि सभी नेता सत्ता और पैसे के भुखे है।
मुम्बई मे हुई इतनी बड़ी आतंक की घटना अपने पीछे कई सवाल छोड़ गयी। मुम्बई मे आतंकवादि इतनी बड़ी आतंक की घटना को अंजाम दे गये तब कहाँ थे ये नेता। क्या इन्हे सिर्फ़ आम चुनाव के समय जनता की याद आती है? कहां थी गृहमंत्रालय और कहां था भारत का इंटेलिजेंस …? क्या सब सो रहे थे? मुम्बई दिल्ली और कुछ अन्य बड़े शहर मे आतंकि कार्यवाही के बारे मे पहले हि भारत को अमेरीका के खूफ़िया विभाग ने सूचित कर दिया था फ़िर क्या पूरा सिस्टम सो रहा था? अगर सभी अपने जिम्मेदारी का सही रूप से निर्वहन नही करेंगे तो ये आतंकवादि ही अपने काम को बखूबी अंजाम देंगे और सहर्ष उसकी जिम्मेदारी लेंगे। हमें पता है की सभी अपने जिम्मेदारी का वहन सही रूप से नही करते है और इसी का फ़ायदा आतंकवादि उठा ले जाते है।

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