Monday, March 24, 2014
क्यों लोकसभा चुनाव है...
लोकसभा चुनाव है, जनतंत्र का पर्व है...
खाली पेट रैलियों में, रोटियों की आस है
वोटर आज भी आम है, नेता हो चुके खास हैं
धूप सीना फाड़ती, आंखों में दर्द है...
लोकसभा चुनाव है, जनतंत्र का पर्व है..
देखो फिर आ गए वोट ये लूटने
आपके दर पर हाथ जोड़कर टूटने
शून्य इनका कर्म है, नीतियां सर्द हैं
लोकसभा चुनाव है, जनतंत्र का पर्व है
लो शुरु हो गई है, जात की राजनीति
फिर भी जिंदा हैं लोग, उम्मीदों की बात है
विकास लहूलुहान है, लेकिन नेताओं को गर्व है
लोकसभा चुनाव है, जनतंत्र का पर्व है
दिल्ली के केजरी, गुजरात के मोदी
आज के नेताओं ने उम्मीदें हैं तोड़ दीं
ठगा हुआ मानस फिर खुद से पूछ रहा
क्यों लोकसभा चुनाव है, क्यों जनतंत्र का पर्व है
विवेक शांडिल्य
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