सहवाग को टीम से बाहर करके BCCI
ने सोचा कि वो अपने दामन पर लगे हार के दाग को धो लेगी लेकिन
जाने अंजाने में बोर्ड ने कुछ ऐसे तारों को छेड़ दिया जिससे बहस के लंबे दौर की शुरुआत हो गई है औऱ एक बार फिर इस सवाल ने जन्म लिया है कि क्या खिलाड़ियों के चयन में ज़ोनवाद हावी है... ऑस्ट्रेलिया में
खेले जारहे मौजूदा सीबी सीरीज में
सिर्फ सहवाग के बल्ले से रन नहीं निकल रहे थे याएकमहज सहवाग हीसारे हार के जिम्मेदार हों, ऐसा नहीं है... इस सीरीज में बल्ले औरगेंदया दोनों से नाकाम रहने वालों की
फेहरीस्त लंबी है... टीम के कुछ ऐसे नवाब हैं जो खेले न खेलेंबोर्डउन्हे मौका देता
रहता है... और अगर टीम प्रबंधनकी बात करें,
तोबोर्ड से टीम की
सोच बहुत ज्यादा अलग नहीं नजर आतीहैं...
टीम भी उन खिलाड़ियों को बाहर नहीं बिठाना चाहता जो आउट ऑफ फॉर्म हों...चाहेकोई खिलाड़ी बेंच
पर ही बैठ कर ही पूरी सीरीज क्यों न निकालदे... बहरहाल मौजूदा टीम के फिस्ड्डी खिलाड़ियों की बात करें तो... इस
सीरीज में न तो सुरेश रैना चले... न तो रवींद्र जडेजा कुछ खास कर पाए... और न तो
आर अश्विन ही गेंद से कमाल दिखा पाए... और फिर भी BCCI ने अपनी दरियादिली दिखाते हुए एशिया कप के लिए उन्हें टीम में जगह दे ही
डाली... वैसे आप इसे साउथ इंडियनचस्में से
देखेंगे तो माजराहो सकता है कि आपके समझ आ जाए...ये वो ही खिलाड़ी हैं जो या तो साउथ जोन से आते हैं या तो
चैन्नई टीम की तरफ से IPL में खेलते हैं...
औरगौर करनें वाली बात है कि जिन लोगों का BCCI
में दबदबा है वोभी साउथ जोन से ताल्लुक रखते हैं मसलन अध्यक्ष महोदय श्री निवासन साहब...
मुख्य चयनकर्ताश्रीकांत साहब औऱ टीम के कप्तानधोनी साहब... तो ऐसे मेंइस चैन्नई प्रेम को समझना बहुत मुश्किल नहीं है...
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