Wednesday, September 4, 2013

जनता पर बोझ, नेताओं की मौज

तेल के दाम लगातार बढ़ाए जा रहे हैं और अब सरकार पिर से गैस के दाम बढ़ाने पर विचार कर रही है।
मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि प्रति सिलेंडर हर माह 50 रुपए का इजाफा करके सरकार एक साल में 1016 करोड़ रुपए की बचत कर सकेगी। इस अधिकारी ने कहा कि अपने ग्राहक को जानिए और रियायती सिलेंडर का पैसा सीधे आपके खाते में योजना के अलावा इस बढ़ोतरी के जरिए सरकार ने एक साल में करीब 5-6 हजार करोड़ रुपए की बचत का लक्ष्य रखा है। 
लेकिन इस आर्थिक तंगी में मंत्री व सांसद अपने खर्चों में कटौती को तैयार नहीं है। कई मंत्रालयों में छह से ज्यादा कारें अटैच हैं। वहीं अमूमन हरेक मंत्रालय में कम से कम दो कारें जरूर हैं। इनमें पेट्रोल व डीजल पर आने वाला खर्च लाखों रुपए में है। मंत्री खुद एक गाड़ी प्रयोग करते हैं। इसके अतिरिक्त पीएस, एपीएस और कहीं-कहीं तो पीए व अन्य छोटे कर्मचारी भी सरकारी गाड़ी का मजा लेते हैं। कुछ तो अपने बच्चों को स्कूल छोडऩे से लेकर बाजार हाट तक के लिए सरकारी गाड़ी का ही इस्तेमाल करते हैं। 
हर मंत्रालय में शाहखर्ची: करीब तीन साल पहले के रिकॉर्ड के मुताबिक यानी वर्ष 2009-10 और 2010-11 के दौरान आईटी महकमे में दो साल के पेट्रोल व डीजल का खर्च 37 लाख 30 हजार रुपए से 'यादा था। ग्रामीण विकास मंत्रालय में दो सालों में खर्च हुए करीब 17 लाख 16 हजार रुपए। विदेश मंत्रालय में तीन मंत्रियों को सात कारें दी गई थीं। इनका खर्च था दो साल में 16 लाख 51 हजार रुपए से अधिक। 
टेलीकॉम के पास दो कारें सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक थीं और खर्च था दो साल में 15 लाख 84 हजार रुपए से 'यादा। गैर परंपरागत ऊर्जा स्रोत मंत्रालय जैसे महत्वहीन महकमे में भी गाडिय़ों पर 15 लाख रुपए से 'यादा की राशि खर्च हो गई। स्वास्थ्य व गृहमंत्रालय का खर्च भी इसके आसपास था। सूत्रों के मुताबिक यह खर्च कम होने के बजाए बढ़ा है। सरकारी खर्चों पर कटौती का कोई ठोस प्लान सरकार के पास नहीं है। 

मनमोहन सिंह
पीएम के काफिले में 10 गाड़ियां (इनमें सुरक्षा में तैनात गाड़ियां शामिल नहीं हैं)। 
इनमें दो बीएमडब्लू सीरीज 7 सेडांस कारों के अलावा 6 बीएमडब्लू एक्स 3 कार, 1 जैमर लगी टाटा सफारी और 1 मर्सिडीज बेंज एंबुलेंस।  

सोनिया गांधी 
काफिले में 4-5 गाड़ियां। 
4 टाटा सफारी, 1 रेंज रोवर। 

लालकृष्ण आडवाणी 

काफिले में 6 गाड़ियां। 
1 बुलेटप्रूफ एंबेसडर, 4 एंबेसडर और 1 जैमर लगी टाटा सफारी।  
1 जैमर लगी टाटा सफारी 

प्रकाश सिंह बादल और सुखबीर बादल 

पंजाब के सीएम और डिप्टी सीएम। 
51 गाड़ियां। 
बादल पिता-पुत्र बुलेटप्रूफ टोयोटा लैंड क्रूजर में चलते हैं। सुखबीर बादल के काफिले में मुख्यमंत्री के काफिले से आमतौर पर ज्यादा गाड़ियां होती हैं।

जे. जयललिता 
तमिलनाडु की मुख्यमंत्री।  
20 गाड़ियां। 
जयललिता के काफिले में बुलेट प्रूफ एसयूवी शामिल। दो गाड़ियों पर मोबाइल जैमर लगे होते हैं। दो एस्कॉर्ट कार। ४ पायलट कार। एक एंबुलेंस और मीडिया वालों की एक कार। 

अखिलेश यादव 
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री। 
20 गाड़ियां। 
अखिलेश एसयूवी या एंबेसडर कार में चलते हैं। जब वे किसी जिले के दौरे पर होते हैं तो उनके काफिले में गाड़ियों की संख्या बढ़कर 30 हो जाती है।

भूपिंदर सिंह हूडा 
हरियाणा के मुख्यमंत्री।  
25 गाड़ियां। 
हूडा के काफिले में 24 फोर्ड एंडेवर गाड़ियां शामिल। खुद हूडा ह्युंदै सेंटा फे से चलते हैं। 

उमर अब्दुल्ला 
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री। 
10-25 गाड़ियां। 
अब्दुल्ला के काफिले में एक पायलट कार, 4 एस्कॉर्ट गाड़ियां (इनमें से ज्यादातर महिंद्रा स्कॉर्पियो), २ टाटा सफारी, एक रेंज रोवर, जैमर से सजी एक एसयूवी और एक एंबुलेस। 

नरेंद्र मोदी 
गुजरात के मुख्यमंत्री। 
10-12 गाड़ियां। 
नरेंद्र मोदी के काफिले में 9 महिंद्रा स्कॉरपियो, एक एंबुलेंस, एक अग्निशमन वाहन और एक विस्फोटक जांच करने वाली गाड़ी शामिल है। 

नीतीश कुमार 
बिहार के मुख्यमंत्री। 
12 गाड़ियां। 
नीतीश आम तौर पर एंबेसडर कार में चलते हैं। सिर्फ लंबी दूरी के लिए वे एसयूवी का इस्तेमाल करते हैं। उनके काफिले में एक अतिरिक्त एंबेसडर कार होती है जिसे पहली एंबेसडर के खराब होने की स्थिति में इस्तेमाल किया जा सके। काफिले में बाकी 10 गाड़ियों में सुरक्षा कर्मी और मीडिया वाले सफर करते हैं।  


पृथ्वीराज चव्हाण 
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री। 
6 गाड़ियां। 
चव्हाण एक बुलेट प्रूफ टाटा सफारी में चलते हैं। तीन महिंद्रा स्कॉरपियो एसयूवी और पुलिस जिप्सी उनकी सुरक्षा में तैनात है

शिवराज सिंह चौहान 
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री। 
6 गाड़ियां। 
शिवराज सिंह चौहान शेवरले की कैप्टिवा में सफर करते हैं। उनके काफिले में एक जिप्सी शामिल होती है, जिसे पायलट कार के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा चार एंबेसडर कार भी शामिल होती है।

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