Wednesday, September 29, 2010

मै अयोध्या हूँ...

मै अयोध्या हूँ...

मैंने दिन देखा है, मैंने दुनिया देखी है, मैंने समय देखा है, मैंने लोग देखे है श्री राम से लेकर मनमोहन सिंह तक। वक़्त बदला लोग बदले पर मै आज भी वही हूँ और शांत खड़ा होकर तमाशा देखा रहा हूँ । मेरे नाम पर पंडित देखे, मेरे नाम पर मुल्ला और मौलबी देखे, मेरे नाम पर नेता देखे और मेरे नाम की राजनीति देखी । लोगों ने मुद्दे भी खुद बनाए संघर्ष भी आपस में ही किया और आज तक हल नहीं निकल पाए।

चलिए मै आपको अपनी कहानी सुनाता हूँ...

मै रामजन्मभूमि अयोध्या उत्तर प्रदेश में सरयू नदी के दाएं तट पर बसा हूँ । प्राचीन काल में मुझे कौशल देश कहा जाता था। मै हिन्दुओं के प्राचीन और सात पवित्र तीर्थस्थलों में से एक हूँ । अथर्ववेद में मुझे ईश्वर का नगर बताया गया है और मेरी संपन्नता की तुलना स्वर्ग से की गई है। रामायण के अनुसार मेरी स्थापना मनु ने की थी। कई शताब्दियों तक मै सूर्यवंशी राजाओं की राजधानी रहा। अयोध्या मूल रूप से मंदिरों का शहर है। यहां आज भी हिन्दू, बौद्ध, इस्लाम और जैन धर्म से जुड़े अवशेष देखे जा सकते हैं। जैन मत के अनुसार यहां आदिनाथ सहित पांच र्तीथकरों का जन्म हुआ था।

विवाद...

1528:
हिन्दूओं के आराध्य देवता श्रीराम की जन्मभूमि पर मस्जिद बनवाई गई। बताया जाता है कि इसे मुग़ल सम्राट बाबर ने बनवाया था।

1853: यह वह वर्ष था जब अयोध्या में मंदिर-मस्जिद विवाद का मुद्दा बना। और पहली बार इस स्थल के पास सांप्रदायिक दंगे हुए।

1859: इस विवाद को सुलझाने के लिए तत्कालीन शासक ने विवादित जगह को चारों तरफ से घेर दिया। अब मुसलमान विवादित परिसर के भीतर इबादत और हिन्दू बाहर प्रार्थना करने लगे।

1949: दोनों पक्षों ने अदालत में मुकदमा दायर किया। सरकार ने इस स्थल को विवादित घोषित कर दिया और ताला लगा दिया।

1984: विश्व हिंदू परिषद के नेतृत्व में एक समिति का गठन। जिसका मुख्य उद्देश्य राम जन्मभूमि को मुक्त करना था। बाद में इस अभियान की जिम्मेदारी भाजपा के एक प्रमुख नेता लालकृष्ण आडवाणी पास आ गईं।

1986: बाबरी मस्जिद संघर्ष समिति का गठन। फैजाबाद सेशन कोर्ट ने विवादित मस्जिद के दरवाज़े पर से ताला खोलने का आदेश दिया। मुसलमानों ने विरोध किया।

1989: विश्व हिंदू परिषद ने विवादित स्थल के नज़दीक राम मंदिर की नींव रखी।

1992: 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया। इसमें विहिप, भाजपा व शिव सेना के कार्यकर्ता शामिल थे। सांप्रदायिक दंगे हुए। 2000 से अधिक लोग मारे गए।

13 मार्च, 2002: सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या पर अपना निर्णय देते हुए कहाकि यथास्थिति बरक़रार रखी जाएगी। शिलापूजन नहीं होगी।

अप्रैल 2003: इलाहाबाद हाइकोर्ट के निर्देश पर पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग ने विवादित स्थल की खुदाई शुरू की, जून महीने तक खुदाई चलने के बाद आई रिपोर्ट में कहा गया है कि उसमें मंदिर से मिलते जुलते अवशेष मिले हैं।

19 मार्च 2007: राहुल गाँधी ने चुनावी दौरे में कहा कि अगर नेहरू-गांधी परिवार का कोई सदस्य प्रधानमंत्री होता तो बाबरी मस्जिद न गिरी होती।

30 जून 2009: प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को 17 वर्षों के बाद लिब्रहान आयोग ने अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी। इस आयोग का गठन बाबरी मस्जिद ढहाए जाने की जांच के लिए गठित किया गया था। लेकिन कुछ भी साफ़ नहीं हो पाया।

जुलाई, 2010: रामजन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद पर सुनवाई पूरी।

सितम्बर 2010 : ३० सितम्बर को इलाहबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच सुनाएगी फैसला

"'मेरे शरीर पर हजारो ज़ख़्म दिए फिर भी मै मुस्कुराता रहा लोगों की मूर्खता पर की "दिल में बसने वाले परमात्मा को लोग कहाँ तलाश रहे है" कभी मंदिर बनवाया तो कभी मस्जिद'"

धन्यवाद ...

1 comment:

पुनीत पाठक said...

rअच्छा है...जानकारियां अच्छी हैं..लेकिन..मीडिया पर्ससन को इन तमाम जानकारियों को पिछले दिनों कई बार दोहराना पड़ा पर अंत की पंग्तियां काफ़ी बेहतर हैं..