Saturday, January 21, 2012

"मैं भगवान नहीं हूँ"


भारतीय टीम इस वक्त बुरे दौर से गुजर रही है और टीम के लगभग सभी अनुभवी खिलाड़ी भी अपनी फॉर्म से दो दो हाथ करने में लगे हैं । खराब प्रदर्शन का दौर इंग्लैड से शुरु हुआ था जो कंगारुओं की जमीं तक जारी है। लगातार मिल रही हार से सभी परेशान हैं और ऐसे में क्रिकेट फैंस की नाराजगी भी वाजिब है । खासकर सचिन, द्रविड़ और लक्ष्मण से क्योंकि इनसे फैंस की उम्मीदें हमेशा दोगुनी रहती है। लेकिन इन सब के बीच जब बात सन्यास की आती है तो कोई भी क्रिकेट प्रेमी ये सोचने पर जरुर मजबूर हो जाता है कि इसके बाद भारतीय क्रिकेट किस दिशा में जाएगा। उसके दिल में ये खौफ जरूर आता है कि अगर भारतीय क्रिकेट के ये महारथी गए तो हो सकता है कि भारतीय टीम बिना हाड़ वाला शरीर रह जाए। जो जिंदा तो रहेगी पर किसी काम की नहीं, क्योंकि हम उनकी विदाई के लिए शायद तैयार नहीं हैं। खैर ये तो बात रही तीन महारथीयों की लेकिन आप जरा ये फर्ज कीजिए कि सचिन कल ही सन्यास लेने वाले हों, सोच के ही डर लगता है। वो इतने महान है, जिसका अंदाजा लगा पाना नामुमकिन सा लगता है। जब सचिन ने खेलना शुरु किया था यानी 1989 से लेकर अब तक 23 साल का लंबा करियर, इतना लंबा कि एक पूरी जेनरेशन जन्म लेने के बाद टीनेज से बाहर आ चुकी है। अंदाजा लगा सकते हैं कि कितना अनुभव है इस महान बल्लेबाज के पास। टेस्ट और एकदिवसीय मैचों को जोड़ दिया जाए तो आंकड़े इतने उंचे है कि आप वहां तक नजरे नहीं पहुंचा सकते हैं। 641 अंतराष्ट्रीय क्रिकेट मैच का अनुभव, 291 फर्स्ट क्लास मैचेस, 33,553 अंतराष्ट्रीय रन, तो वहीं घरेलू क्रिकेट में 48,104 रन, 99वें अंतराष्ट्रीय शतक, 160 अंतराष्ट्रीय अर्धशतक, 138 घरेलू शतक, यही नहीं वनडे में 86.32 की स्ट्राइक रेट, 1,981 अंतराष्ट्रीय वनडे चौके, 149 अंतराष्ट्रीय कैच, 6 टेस्ट दोहरे शतक, वनडे में नाबाद 200 रन। ये तो महज चंद रिकॉर्ड्स हैं जो सचिन की काबिलीयत को बयां करते हैं, वरना फेहरीस्त तो काफी लंबी है। सचिन तेंदुलकर भारतीय क्रिकेट का वो सितारा हैं जो अपनी चमक से पूरी दुनिया में भारत को रोशन करता है।

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