Friday, January 27, 2012

मैच ही नहीं काफी कुछ हार चुकी है टीम इंडिया


मैच ही नहीं काफी कुछ हार चुकी है टीम इंडिया 

सचिन तेंदुलकर व पीटर सिडल
ऑफिस में अपने स्पोर्ट्स डेस्क पर बैठा काम कर रहा था... इतने में कार्यालय में ऑफिस बॉय के तौर पर काम करने वाले एक सज्जन ने आकर पूछा... भैय्या भारतीय टीम तो सभ्भे मैच हार गई अब ये उसका गुस्सा था या चुटकी लेने का अंदाज ये बता पाना थोड़ा मुश्किल है... इन दिनों ये हाल क्रिकेट से प्यार करने वाले या दिलचस्पी लेने वाले हर शख्स के अंदर देखी जा सकती है.... खैर ये तो बात हमारी रही टीम की बात करें तो टीम इन दिनो ऑस्ट्रेलिया में गौरव पाने का कोई मौका नहीं चूक रही है... और हो भी क्यूं न... हमारे खिलाड़ी जो इतने जोशीले हैं.... दनादन बोल्ड होते हैं... कैच देते हैं, ऐसी बात नहीं है सिर्फ देते हैं छोड़ते भी है, साथ ही हमारे खिलाड़ी आउट होने के लिए मैदान पर टाइम टू टाइम आ जाते हैं और टाइम टू टाइम निकल भी लेते हैं... टाईम मैनेजमेंट का ख्याल रख रहे ये खिलाड़ी भर्षक कोशिश करते हैं कि पांच दिन तक चलने वाला टेस्ट दो से तीन दिन में ही सिमट जाए... ताकी ऑस्ट्रेलिया का पर्यटन व्यापार भी कुछ सांसे ले सके वाकई कितने दिलदार हैं हमारे खिलाड़ी... वहीं टीम के खिलाड़ियों को देख कर कभी कभी ऐसा भी लगता है कि बेवजह ही इन पर ताने कसे जा रहे हैं क्योंकि हमारे जांबाज इंग्लैड में ही दिखा चुके थे कि वो नहीं खेल सकते लेकिन न BCCI  माने तब न... क्रिकेट बोर्ड का सरल नारा सोते रहो और सोने दो... ना, बात तो बिल्कुल जायज है अब सवा अरब में 11 खिलाड़ियों को निकालना बाप रे बाप, समंदर में चाभी ढूंढने के बराबर है.... खैर दुनिया की सबसे अमीर बोर्ड की कहानी तो ये रही लेकिन सबसे मजबूत बैटिंग लाईन अब का किस्सा अभी बाकी है, जनाब ! भारत की सलामी जोड़ी से कहानी शुरु करते हैं, ये जोड़ी अपने नाम को बखुबी सार्थक करती है वो ऐसे कि ये मैदान पर गेंदबजों को सलाम करते हैं और निकल लेते हैं अपने विकेट उनको तोहफे में देकर... टीम के 4 उपर के बल्लेबाज तो ऐसे जिनके रन किसी भी मौजूदा टीम के मुकाबले भारी पड़ जाए.... सहवाग, सचिन, द्रविड और लक्ष्मण... इन चारों खिलाड़ियों के आंकड़े भी यही बयां कर रहे थे और यही टीम की सबसे बड़ी मज़बूती भी थी... ये चार खिलाड़ी  टीम में सबसे ज्यादा अनुभवी हैं.... टीम को जब उनके बल्ले की सबसे ज्यादा जरुरत थी तब वो टीम को बीच मझधार में छोड़ कर कंगारुओं के सामने हथियार डाल मैदान से चलते बने... ऐसे आउट हुए जैसे पहली बार मैदान पर बल्लेबाजी करने के लिए आए हों... बात सेहवाग की करें तो टीम का ये शानदार खिलाड़ी स्लिप में खड़े खिलाड़ियों को कैच प्रैक्टिस कराना नहीं भूलते... हांलाकि कभी कदाल नींद से जाग गए तो एक आध रिकॉर्ड तोड़ ही देते हैं... दीवार की बात करें तो राहुल द्रविड लगातार बोल्ड हो रहे हैं... राहुल आज कल ऐसे आउट होते हैं जैसे भारतीय टीम के दीवार से दो चार इंटे कंगारुओं ने गायब कर दी हों और गेंद बार बार वहीं से निकलकर विकेट पर सजी गिल्लियों को बिखेर जाती हैं... सचिन तेंदुलकर के बारे में ज्यादा कहना उचित नहीं होगा टीम के उम्रदराज खिलाड़ी हैं और यही वजह की बल्ले का बोझ उनसे संभाले नहीं संभल रहा है... बल्ला जब तक नीचे आता है गेंद निकल चुकी होती है... रही बात हमारे बहुत खास खास खिलाडी यानी वेरी वेरी स्पेशल लक्षमण की तो आज कल क्रिकेट का ये लक्षमण कंगारुओं के लिए भले ही लक्ष्मण रेखा न खींच सका हो लेकिन खुद उसमें उलझे नजर आ रहे हैं... हालात और क्या बुरे हो सकते हैं जब ये खिलाड़ी देश को विदेशी सरजमीं पर हारने के लिए छोड़ चुके हों... रही बात हम सब खेल प्रेमियों की तो हम सब तो दो दिन हो हल्ला करेंगे फिर तीसरे दिन जब अगला मैच शुरु होगा सब कुछ भुला बैठेंगे... और इसी का फायदा बोर्ड और उसकी टीम को हमेशा होता है... क्यों न क्रिकेट का ही बहिष्कार कर दिया जाए.. खैर ये तो बड़ा सवाल है... बहरहाल जो भी हो टीम सिर्फ मैच या सीरीज ही नहीं हारी है... टीम ऑस्ट्रेलिया में काफी कुछ हार चुकी है...

2 comments:

Vishwesh said...

Awesome writing guru maan gaye

Anonymous said...

धन्यवाद विश्वेश जी आपके हौसला आफ़ज़ाई के लिए आगे भी... हमें इसका इंताज़ार रहेगा...