किसी भी टीम के लिए मजबूत मध्यक्रम का होना बहुत अहम होता है जिससे टीम में एक आधार बनी रहे लेकिन भारत के खिलाड़ी मिडिल डिस ऑर्डर बन चुके हैं. कहते हैं कि पारी अगर बिगड़ जाए या टीम को खराब शुरुआत मिले तो मिडिल ऑर्डर की ही जिम्मेदारी होती है वो टीम को संभाल कर एक सम्मानजनक स्थिती में ले जाए. लेकिन न तो कोहली में वो बात नजर आई है और न ही कप्तान धोनी वो कमाल कर पाए हैं. चलिए थोड़ा फ्लैश बैक में आपके लिए चलते हैं. वैसे तो कप्तान साहब को टेस्ट क्रिकेट कभी रास ही नहीं आया फिर भी आंकड़ों को देखें तो ये बात और भी साफ हो जाती है.
वेस्टइंडीज में धोनी ने तीन टेस्ट मैच खेले जिसमें 19.4 की औसत से 97 रन बनाए. यही नहीं यहां उनका उच्चतम स्कोर महज 74 रन ही रहा... यानी बाकी के दो मैचों में 23 रन. थोड़ा आगे चलें तो टीम इंग्लैड पहुंची. वहां भी कप्तान धोनी का बल्ला कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हुआ. हांलाकि कप्तान साहब ये राग जरुर अलापते रहे की हम वापसी करेंगे. वहां धोनी ने 4 मैच खेले जिसमें 31.42 की औसत से 220 रन अपने नाम किए. लेकिन यहां भी वो 77 रन से आगे नहीं जा सके. फिर लगा कि नाकामियों का सिलसिला कंगारुओं की जमीं पर टूट जाएगा. लेकिन कप्तान साहब तो कुछ और ही कसम खाए बैठे थे. वहां 3 टेस्ट खेलते हुए 20.40 की औसत से 102 रन बनाए हैं. कप्तान के तौर पर देश को निराश करने वाले धोनी को चौथे टेस्ट में स्लो ओवर रेट के कारण बैन कर दिया गया है. यानी खेल खतम पैसा हजम. रही बात कोहली की तो वो भी टेस्ट क्रिकेट में जीरो बटा सन्नाटा ही नजर आते हैं. वेस्टइंडीज में कोहली ने 3 मैच खेले जिसमें 15.20 की औसत से शानदार 76 रन बनाए उच्चतम स्कोर 30 रन रहा... तो वहीं उनका सौभाग्य रहा की वो इंग्लैड में नहीं खेल पाए वरना आंकड़े और भी दयनीय हो जाते. रही बात मौजूदा ऑस्ट्रेलियाई सीरीज की तो वो यहां पर भी अपने आप को साबित करने में नाकाम रहे. यहां 3 मैच खेलते हुए 27 की औसत से कोहली ने 162 रन बनाए जिसमें उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 75 रन रहा... आंकड़े गवाह रहे हैं कि इन खिलाड़ियों ने खराब खेल के बावजूद अपने खेल में सुधार नहीं किया. कहते हैं सबक लेने के लिए एक गलती काफी होती है लेकिन इन खिलाड़ियों को इतने मौके दिए जाते रहे की गलतियां इनके लिए सबक नहीं महज भुला देने वाले आंकड़े बन गए... ये BCCI की लापरवाही के अलावा और कुछ भी नहीं अगर खिलाड़ियों को खराब खेल के कारण पहले ही बाहर का रास्ता दिखाया गया होता तो भारतीय क्रिकेट आज इस मुकाम पर नहीं खड़ा होता.
1 comment:
Good Note But Try to focus on all aspects. I mean we should think from everybody perpectives whether it's BCCI, DHONI or individual players.
KEEP IT UP!!!!!!!!!!
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